सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से शेयर किया जा रहा है जिसमें भारतीय सेना के जवान एक मीटिंग से बाहर निकलते हुए दिख रहे हैं, जबकि इस दौरान एक व्यक्ति उनसे पूछ रहा है कि सेना किस बात से डरी हुई है.
दावा: इस वीडियो को यह दावा करते हुए शेयर किया जा रहा है कि भारतीय सेना के जवान एक मीटिंग से इसलिए बाहर निकल आए क्योंकि उन्हें वह फंडिंग नहीं मिली जिसकी उन्हें "पाकिस्तान और चीन से निपटने के लिए जरुरत थी."
क्या यह सच है?: नहीं, यह दावा झूठा है.
वायरल वीडियो मार्च 2025 का है और इसमें एक पत्रकार को कर्नल बाथ असॉल्ट केस के सिलसिले में आर्मी के प्रतिनिधियों की आलोचना करते हुए देखा जा सकता है.
हमने सच का पता कैसे लगाया ?: हमने वायरल वीडियो पर 'रिवर्स इमेज सर्च' ऑप्शन का इस्तेमाल किया, जिससे हमें पंजाब के पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया की 25 मार्च 2025 की एक पोस्ट मिली.
इस पोस्ट में उन्होंने पत्रकार मन अमन सिंह छिना का शुक्रिया अदा किया था कि उन्होंने "कर्नल पुष्पेंद्र सिंह बाथ और उनके परिवार को न्याय दिलाने के लिए लगातार सवाल पूछे."
अमन सिंह छिना के X अकाउंट पर इससे सम्बंधित कीवर्ड सर्च करने पर हमें वही क्लिप मिली, जिसे उनके अकाउंट से 25 मार्च 2025 को शेयर किया गया था.
उन्होंने कहा कि वेस्टर्न कमांड के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल मोहित वाधवा ने पटियाला कर्नल के मामले में "बिना कोई सवाल लिए बयान पढ़कर" प्रेस कॉन्फ्रेंस छोड़ दी थी.
अमन सिंह छीना ने आगे कहा कि हालांकि पटियाला के डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस ने भी बयान पढ़कर कॉन्फ्रेंस छोड़ दी थी, लेकिन "कम से कम उन्होंने हाल के दिनों में मीडिया के सवालों के जवाब तो दिए हैं."
पंजाब सरकार के YouTube चैनल पर 25 मार्च 2025 को शेयर किए गए प्रेस कॉन्फ्रेंस के वीडियो में 03:28 मिनट पर वही सवाल सुने जा सकते हैं.
कर्नल बाथ मामले की जानकारी: पंजाब के पटियाला में 13 और 14 मार्च की रात को पार्किंग को लेकर हुए झगड़े में कर्नल पुष्पिंदर बाथ और उनके बेटे अंगद पर हमला किया गया था.
NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक कर्नल ने पंजाब पुलिस के 12 कर्मियों पर उन दोनों के साथ मारपीट करने का आरोप लगाया था, जिसके बाद उन सभी 12 कर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया था.
शुरुआत में उनके मामले की जांच पंजाब पुलिस ने की थी और बाद में इसे सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) को सौंप दिया गया था.
Hindustan Times की रिपोर्ट के मुताबिक मार्च 2026 में चार आरोपियों को जमानत मिल गई, जबकि अभियोजन पक्ष ने इसका विरोध किया क्योंकि पीड़ित परिवार को डराए-धमकाए जाने का डर था.
इससे पहले अप्रैल 2025 में 'The Quint' ने इस वीडियो से जुड़े एक दावे को गलत साबित किया था, जब इसे गलत तरीके से पहलगाम आतंकी हमले से जोड़ा जा रहा था.
निष्कर्ष: एक पत्रकार का पुराना वीडियो, जिसमें वह सेना के एक जवान पर हुए हमले के मामले को लेकर सेना और पुलिस कर्मियों से उनकी कार्रवाई के तरीकों को लेकर सवाल पूछ रहा है, उस गलत दावों के साथ शेयर किया जा रहा है.
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